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देश के अपने टीवी चैनल ने पूरे किये 60 वर्ष

दूरदर्शन, नाम ही काफी है।  भारत के पहला  टीवी चैनल जो भारत सरकार के द्वारा चलाया जा रहा है, आपको बताते  प्रसन्नता हो रही है की दूरदर्शन ने अपने 60 साल पुरे किये है।  दूरदर्शन एक वो चैनल है जिसे देखने के लिए कभी भारत ठहर सा जाता था। अगर भारत को एकता का मतलब किसी ने समझाया है तो है, वो आपका अपना दूरदर्शन।
दूरदर्शन की शुरुआत भारत की राजधानी दिल्ली से सितम्बर, 1959 से हुयी. जो आज विश्व में  अपने प्रसारण क्षमता और कवरेज के माध्यम से विदेशो में भी देखा जाता है।

दूरदर्शन का इतिहास -

दूरदर्शन की शुरुआत सितम्बर में 1959 में हुयी थी। पहले इसका नाम टेलीविज़न इंडिया था, बाद में इसे दूरदर्शन नाम दिया गया और  शुरुआत में दूरदर्शन चैनल पर प्रसारण, सप्ताह में सिर्फ 3 दिन होता था वो भी आधे  घंटे के लिए।  उसके बाद नियमित दैनिक प्रसारण की शुरुआत 1965 से हुयी। उसके बाद से दूरदर्शन का विस्तार किया गया, 1972 में दूरदर्शन सेवा मुम्बईव अमृतसर तक विस्तारित की गई। 1975 तक यह सुविधा 7 शहरों मे शुरु हो गयी थी। रंगीन दूरदर्शन का राष्ट्रीय प्रसारण 1982 से शुरु हुआ था। उससे पहले प्रसारण ब्लैक एंड वाइट में होता था।

इस समय के दौरान लोगो में दूरदर्शन के प्रति इतनी दीवानगी थी की वो अपने जरुरी काम समयानुसार ख़त्म करके खास प्रोग्राम को देखना नहीं भूलते थे  जिनमे कुछ मुख्य प्रोग्राम इस प्रकार थे।

  • हम लोग ( भारत का पहला टीवी सीरियल )
  • बुनियाद 
  • सर्कस 
  • अमूल सुरभि 
  • समंदर 
  • महाभारत 
  • विक्रम वेताल 
  • रामायण 
  • अलिफ़ लैला 
  • श्री कृष्णा 
  • शक्तिमान 
  • चंद्रकांता 


मनोरंजन के कार्यक्रमों में दोपहर 12.00 बजे से अपराह्न 3.00 बजे के बीच प्रसारित किए जाने वाले दैनिक धारावाहिक तथा रात्रि 8.30 बजे से मध्य रात्रि तक प्रसारित किए जाने वाले धारावाहिक कार्यक्रम शामिल हैं। इसमें शुक्रवार, शनिवार और रविवार को फीचर-फिल्मों और माह के अंतिम रविवार को पुरस्कृत क्षेत्रीय फिल्मों का प्रसारण भी शामिल है। उच्च गुणता वाले सिनेमा को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए, माह के अंतिम रविवार को रात्रि 11.30 बजे राष्ट्रीय स्वर्ण कमल एवं रजत कमल पुरस्कार पाने वाली क्षेत्रीय फीचर-फिल्मों का प्रसारण किया जाता है।

उसके बाद दूरदर्शन ने 1984 में अपना दूसरा चैनल शुरू DD-2 जो की शहरों के लिए था, शुरुआत दिल्ली से ही की गयी और बाद में इसे 1993 में इसे  मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भी पहुंचाया गया। बाद में इस चैनल  का नाम DD Metro किया गया।  और नवंबर 2003 में इस चैनल को DD News के रूप में एक 24 घंटे का सरकारी न्यूज़ चैनल बना दिया गया।

दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल्स -

दूरदर्शन नेशनल, डीडी न्यूज़ , डीडी भारती, डीडी स्पोर्ट्स, डीडी किसान, और डीडी उर्दू ये 6 चैनल आते हैं।  और DD India (दूरदर्शन भारत ) देश का पहला अंतर्राष्ट्रीय चैनल है। डीडी-नेशनल पर ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं जिनका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना तथा मन में एकता एवं भाई-चारे की भावना बैठाना है। यह चैनल देश का नम्बर एक चैनल है। क्युकी इसकी TRP को मापा नहीं जा सकता क्युकी ये अलग अलग माध्यम से देश के लोगो तक पहुँचता है।  जिसमे DD फ़्रीडिश, डिजिटल टेररिस्ट्रियल सेवा, DTH और केबल टीवी आदि आते है।  डीडी-नेशनल पर मनोरंजन, सूचना एवं शिक्षा संबंधी कार्यक्रमों का स्वस्थ मिश्रण होता है। इस चैनल पर प्रात: 5.30 बजे से मध्य रात्रि तक स्थलीय मोड में सेवा उपलब्ध कराई जाती है। उपग्रह मोड (Cable TV, IPTV & DTH) में डीडी-नेशनल चौबीस घंटे उपलब्ध रहता है। लोक सेवा के इस मिश्रित चैनल के प्रसारण का समय इस ढंग से तैयार किया गया है कि यह विभिन्न समयों पर विभिन्न श्रेणी के दर्शकों की आवश्यकताओं को पूरा करता है।

सभी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों जैसे गणतंत्र दिवस परेड, स्वतंत्रता दिवस समारोहों राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधनों, संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण, संसद में होने वाली महत्वपूर्ण बहसों, रेलवे और आम बजट प्रस्तुत करने, लोकसभा और राज्यसभा के प्रश्न काल, चुनाव परिणाम और उनका विश्लेषण, शपथ ग्रहण समारोहों, राष्ट्रपति एवं प्रधान मंत्री की विदेश यात्राओं और विदेश से भारत आने वाले विशिष्ट व्यक्तियों की यात्राओं का डीडी-नेशनल पर सीधा प्रसारण किया जाता है। महत्वपूर्ण खेल-कूद आयोजनों जैसे ओलंपिक, एशियाई खेल, क्रिकेट टेस्ट मैचों और अन्तर्राष्ट्रीय एक दिवसीय मैचों, जिनमें भारत एवं अन्य महत्वपूर्ण खेल प्रतिद्वंदी भाग ले रहे हों, का भी सीधा प्रसारण किया जाता है।

शिक्षा संबंधी कार्यक्रम इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), केंद्रीय शिक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईईटी) और राज्य शिक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान (एसआईईटी) जैसे विभिन्न स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं। इसके अलावा, टर्निंग प्वाइंट, प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम, टेरा क्विज और भूमि (पर्यावरण से संबंधित कार्यक्रम) जैसे प्रायोजित कार्यक्रम, महिलाओं, जनजातीय मामलों से जुड़े विषयों पर कार्यक्रम और लोक सेवा संबंधी अन्य कार्यक्रम भी नियमित आधार पर प्रसारित किए जाते हैं।

क्या आप जानते है दूरदर्शन आज के समय में दूरदर्शन कहा पंहुचा है तो चलिए थोड़ा नीचे निगाह डालते है। 

आज 2019 में दूरदर्शन के 25 से ज्यादा क्षेत्रीय टीवी चैनल्स है जो अपने अपने राज्य की संस्कृति और एकता को बनाये रखने में सहायता कर रहा है।  वो उनकी खुद की भाषा में। 
दूरदर्शन ने संसद की कार्यवाही को सीधे देश की जनता तक पहुंचाने के लिए अलग से दो चैनल्स, लोक सभा टीवी और राज्य सभा टीवी का संचालन किया और आज भी कर रहा है।
दूरदर्शन ही है जो फ्री में देश के लोगो को 100 से ज्यादा चैनल्स फ्री में डी डी फ्रीडिश के माध्यम से पहुँचा रहा है। और 50 एजुकेशनल चैनल्स अलग से।
दूरदर्शन ने किसानो के लिए अलग से चैनल डी डी किसान भी शुरू किया  है। जिसे आज गाँवो में बहुत बड़ी संख्या में देखा जाता है। किसान को समय समय से मौसम और फसल की जानकारी मिलती रहती है। 
दूरदर्शन ने ही देश की संस्कृति को बनाये रखने के लिए इनका विभाग डी डी भारती चैनल भी चला रहा है जिसे आज की पीढ़ी के बच्चो को जरूर देखना चाहिए. ताकि वो देश की संस्कृति और शिक्षा को समझ सके।
दूरदर्शन के डी डी फ्रीडिश के द्वारा ही भारत के छात्रों  को फ्री में शेक्षिणक चैनल्स मिलते है जिनकी संख्या 50 के पास है जो MHRD और वंदे गुजरात के माध्यम से चलाये जा रहे है। जिसके द्वारा टीवी चैनल्स के द्वारा गांव के लोगो को शिक्षित किया जा रहा है।
दूरदर्शन ने हाल ही में DTT प्रसारण सेवा चालू की जिसके माध्यम से अब दूरदर्शन को मोबाइल, चलती हुयी गाडी या ट्रैन में भी देखा जा सकता है वो भी बिना इंटरनेट के।
और दूरदर्शन का सबसे हाल ही का सराहनीय कदम ये है की अब दूरदर्शन के दो राष्ट्रीय चैनल डी डी नेशनल और डी डी न्यूज़ फुल HD में और डॉल्बी डिजिटल साउंड के साथ उपलब्ध है वो भी फ्री।












जाने! आपके पसंदीदा हिंदी टीवी चैनल्स डीडी फ्री डिश से क्यों गायब हुए ?

जाने! आपके पसंदीदा हिंदी टीवी चैनल्स डीडी फ्री डिश से क्यों गायब हुए ?

जब से डी डी फ्री डिश से पॉपुलर हिंदी चैनल्स गायब हुए है तब से लोगो के मन में सिर्फ एक ही प्रश्न है की ऐसा क्यों हुआ, सारे पॉपुलर चैनल्स का डी डी फ्री डिश से हट जाना ये उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं है. डी डी फ्री डिश का इस्तेमाल आज देश के रूरल एरिया (गाँवो ) में ही नहीं बल्कि अर्बन (शहरो) में भी लोगो द्वारा देखा जाता है.

अब इतना सब हो जाने के वाद लोगो के मन में बहुत सारे प्रश्न है जिनके उत्तर आज हमने ढूढ़ने की कोशिश की है:
प्रश्न : डी डी फ्री डिश से पॉपुलर हिंदी चैनल्स को क्या प्रसार भारती / डी डी फ्री डिश / दूरदर्शन ने हटाया है ?
उत्तर : नहीं बिलकुल नहीं, अभी हाल ही में डी डी फ्री डिश ने 38th ऑनलाइन नीलमी की थी पर आपके किसी भी पसंदीदा चैनल ने इस ऑक्शन में भाग नहीं लिया। मतलब डी डी फ्रीडिश या सरकार ने इन्हे नहीं हटाया, बल्कि ये चैनल्स डी डी फ्री डिश पर खुद नहीं आए.
प्रश्न : क्या कारण है की डी डी फ्रीडिश के पॉपुलर चैनल्स ने प्रसार भारती की ऑनलाइन नीलामी में भाग नहीं लिया ?
उत्तर : यहाँ जब इसके बारे में पता किया गया तो मुख्य रूप से दो कारण सामने आये, और भी कारण हो सकते है पर जो हमें पता चले वो बताते है:
A - डी डी फ्री डिश की नयी सुधार पॉलिसी :
डी डी फ्रीडिश में पॉपुलर हिंदी चैनल्स की वज़ह से दूरदर्शन के खुद के चैनल्स की advertisement Revenue का बहुत कम हो जाना।
साथ साथ डी डी फ्रीडिश की नीलामी में प्राप्त पैसो से कही ज्यादा डी डी फ्री डिश का खर्चा सरकार पर आ रहा था, मतलब डी डी फ्रीडिश और दूरदर्शन के चैनल्स दोनों ही घाटे में चल रहे थे।
भारत के हर घर में पहुंचने वाला दूरदर्शन और हर मध्यम वर्ग से लेकर गरीब तक पहुंचने वाली डी डी फ्री डिश का घाटे में होना अपने आप में बता रहा था की इसमें शुरू से लेकर अब तक कोई सुधार कभी किया ही नहीं गया. जबकि दूरदर्शन के चैनल्स और डी डी फ्री डिश की कमाई "इसकी पहुँच और viewers के हिसाब से" advertisement के द्वारा बहुत ज्यादा होनी चाहिए थी।
जबकि इसी पॉपुलर्टी का फायदा प्राइवेट कंपनियों या प्राइवेट ब्रॉडकास्टर्स ने उठाया, उन्होंने अपने अपने फ्री चैनल्स को दूरदर्शन पर लगा दिया, जहाँ से उन्हें उम्मीद से दुगुनी कमाई हुयी। क्युकी लोग उनके चैनल्स ही देखते थे. आपको जानकार हैरानी होगी की इन प्राइवेट चैनल्स पर दिखाया जाने वाले प्रोग्राम्स काफी पुराने होते थे, जिनसे ब्रॉडकास्टर्स पहले ही कमा चुके होते थे. मतलब आम के आम और गुठलियों के दाम वसूल कर रहे थे.
तो मजबूरी में प्रसार भारती को अपने घाटे में सुधार के लिए डी डी फ्री डिश की पॉलिसी में कुछ सुधार करने पड़े, जैसे :
हिंदी General Entertainment Channels और हिंदी मूवी चैनल्स के स्लॉट का दाम पहले से दुगुना कर दिया गया, और क्षेत्रीय भाषाओँ के चैनल्स को काफी डिस्काउंट दिया गया.. मतलब पहले Sony PAL, Star Utsav, Zee Anmol आदि चैनल्स एक स्लॉट के लिए 6 करोड़ से लेकर 9 करोड़ तक देते थी, जो की अब बढाकर 15 से लेकर अधिकतम नीलामी तक कर दी गयी तो परिणाम स्वरुप इन सभी चैनल्स की कंपनियों ने संगठित होकर डी डी फ्री डिश का बॉयकॉट किया, ऐसा सुनने में आया.

B - ट्राई का पे टीवी और फ्री टीवी के लिए नयी शर्ते लागु करना (TRAI’s New Regulations) :
वो कहते है न की गरीबो के जब भी बुरे दिन आते है तो चारो तरफ से आते है. देखिये जब प्राइवेट कंपनियों का केस हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुँचा तो ट्राई (TRAI ) ने प्रत्येक टीवी चैनल को अपनी अपनी Maximum Retail Price (एमआरपी ) निर्धारित करने को कहा ताकि पेमेंट आदि को लेकर झगड़ा न हो और बिलिंग भी क्लियर रहे.
साथ ही कुछ और शर्ते भी बनाई जिसका नुकसान डीडी फ्री डिश को भी हुआ.. जानते है कैसे।
ट्राई ने कहा प्राइवेट टीवी चैनल्स कंपनियां अपने पे टीवी चैनल्स की एमआरपी निर्धारित करे और अपनी अपनी वेबसाइट पर बताये.
प्राइवेट टीवी चैनल्स कंपनियां अपने फ्री टु एयर चैनल्स भी बताये। जो फ्री मतलब फ्री होंगे

अगर किसी के कंपनी के पास एक से अधिक पे चैनल्स है तो वो उनका बुकेट बना सकती है पर उस बकेट में फ्री टू एयर चैनल नहीं होना चाहिए बस इसी बिंदु ने सभी फ्री टू एयर चैनल्स को पे चैनल्स में बदल दिया। क्युकी सभी प्राइवेट कंपनियां अपने अपने बकेट को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित, ज्यादा चैनल वाला और कम दाम में देने की कोशिश में है.
अगर आपके सभी DD Free dish के पॉपुलर चैनल्स फ्री टू एयर रहते तो इन्हे पे चैनल्स के साथ मिलाकर नहीं बेंचा जा सकता था । तभी तो प्राइवेट कंपनियों ने उन अपने फ्री टू एयर चैनल्स को कम से कम 0.10 Paise तक की भी एमआरपी करके उन्हें पे चैनल्स की बकेट में शामिल कर लिया।
इसका एक कारण ये भी है की सभी केबल ऑपरेटर्स और पे DTH ऑपरेटर्स को डर था की कही उनके सभी कस्टमर डी डी फ्री डिश पर शिफ्ट न हो जाये, क्युकी ट्राई के नए नियम के बाद टीवी का महीने का खर्च कम होने की बजाय बढ़ गया है. तो ब्रॉडकास्टर्स ने संगठित होकर अपने सभी फ्री चैनल्स को पे कर दिया।
तो अब आप शायद समझ गए होंगे की डी डी फ्री डिश से सारे पॉपुलर चैनल्स एक दम गायब कैसे हो गए. बिलकुल गरीबो और मध्यम वर्ग के लोगो के लिए बुरी खबर है. पर ये तो सभी जानते है की कंपनी या चैनल्स चाहे सरकारी हो या प्राइवेट,समाज सेवा से ज्यादा अपने बिज़नेस पर ध्यान देती है.

On users Questions -
Know Why are the channels removed from DD Free Dish?
Purane TV channels DD Free dish se kyu hataye gaye?


By Sunil Sharma (Guest Post)

दूरदर्शन फ्री डिश के सेट-टॉप बॉक्स मे नयी फ्रीक्वेन्सी भरने के तरीका - In Hindi

दूरदर्शन फ्री डिश के MPEG-2 सेट-टॉप बॉक्स मे नयी फ्रीक्वेन्सी भरने के तरीका (How To Fill New Frequency In The MPEG-2 Set-Top Box Of Doordarshan Free Dish).

यहा ह्म आपको बता दे की MPEG-2 मे और MPEG-4 मे सेट-टॉप को स्कॅन करने का तरीका अलग अलग है, आप सब लोगो की फीडबेक के बाद ह्म यहा MPEG-2 मे स्कॅन (SCAN) करने का तरीका बता रहे है. और आपको बता दे यहा हम ऑटो स्कॅन के तरीके से बता रहे है जिससे की आपका कोई भी चेनल छूटे-गा, नही. अगर फिर भी ये आपके सेट-टॉप बॉक्स के हिसाब से नही है तो घबराईए नही, आप इस लिंक ( Other Set-top Box Settings) पर क्लिक करके अलग-अलग तरह के सेट-टॉप बॉक्स की सेट्टिंग्स को देख सकते है.

Image / Settings Sources: Trackdish.com

अपने रिमोट पर दिए गए बटन "Menu" को दबाये तो आपको नीचे दी हुयी विंडो खुल जाएगी, 

उसके बाद "प्रोग्राम सेट-उप" (Program Set-up)  पर जाकर "ओके" OK करे.


"प्रोग्राम सेट-आप" की विंडो खुलने के बाद आप "ऑटो-स्केन" Auto Scan पर जाए


"ऑटो-स्केन" (Auto Scan) की विंडो खुलने के बाद आप "एंटेना-सेट्टिंग्स" (Antenna Setup) पर जाए.

अब "एंटेना सेट-आप" की विंडो खुलने के बाद ऊपर दी गयी फोटो की तरह अपने सेट-टॉप बॉक्स मे सेट्टिंग्स भरे और रिमोट की बटन EXIT से सेट्टिंग्स सेव करे.
जैसे ही आपकी सेट्टिंग्स सेव हो जाएगी आप दुबारा से "ऑटो-स्केन" की विंडो पर वापस आ जाएगे. उसके बाद ऊपर दी गयी फोटोस की तरह सेट्टिंग्स चेंज कर ले और रिमोट से "ओके" बटन द्वाकर ट्यून करे. सेटिलाइट का नाम कुछ भी बना रहे पर LNB फ्रीक्वेन्सी सही होने चाहिए (09750-10600)


अब आपका सेट-टॉप बॉक्स औतोमटिकली सारे चेनाल्स को सर्च करके सेव कर लेगा. 

कुछ सेट-टॉप बॉक्सों में ऑटो स्कैन करने में अलग फंक्शन दिखाई देते है, उनकी सेटिंग्स आप इस तरह कर सकते है.: (Updated on 14-06-2018)


अगर आपके सेट-टॉप बॉक्स मे "एंटेना सेट्टिंग्स" नही है तो घबराईए मत, आप ऊपर दिए गये चित्र के हिसाब से सेट्टिंग्स कर सकते है. एक बार आप "22K" को "OFF" करके ट्यून करे और एक बार 22K  "On" करके ट्यून करे. इससे आपको DD Free Dish पर ज़्यादा चेनाल्स मिलेगे. आप LNB फ्रीक्वेन्सी को 05150-05150 या 09750-10600 करके ट्यून कर सकते है. ये आपके सेट-टॉप बॉक्स की क्वालिटी पर निर्भर करता है, की किस LNB फ्रीक्वेन्सी को जल्दी और सही ट्यून करेगा.

अब आप कुछ देर प्रतीक्षा कीजिये जब तक की आपका सेट-टॉप बॉक्स १००% तक खोज न ले .
Satellite
Position
Frequency
Polarization
Symbol rate

GSAT-15
93.5° E
11090
Vertical
29500

GSAT-15
93.5° E
11170
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29500

GSAT-15
93.5° E
11470
Vertical
29500

GSAT-15
93.5° E
11510
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29500

GSAT-15
93.5° E
11550
Vertical
29500





अगर फिर भी आपको कोई परेशानी आ रही है तो कोमेंट के ज़रिए बता सकते है. या आप कोई दूसरा सेट-टॉप बॉक्स इस्तेंमाल कर रहे है तो आप यहा क्लिक करके दूसरे सेट-टॉप बॉक्स की सेट्टिंग को देख सकते है. धन्यवाद

जाने! आपके पसंदीदा हिंदी टीवी चैनल्स डी डी फ्री डिश से क्यों गायब हुए ? - March 2019

यदि आप डीटीएच एंटीना, सेट-टॉप बॉक्स, और बड़ा सी-बैंड एंटीना आदि सहित डीटीएच सिस्टम को इनस्टॉल करना या लगाना चाहते हैं, तो आप सीखने के लिए www.trackdish.com पर जा सकते हैं।
यदि आप अपने शहर या क्षेत्र में डीटीएच इंस्टॉलेशन व्यक्ति ढूंढ रहे हैं, तो आप www.easyinstallation.in पर जा सकते हैंags: dd free dish setting, dd free dish frequency setting, dd free dish frequency 2016, dd free dish set top box, dth free channel frequency list 2016, free dish tv channel frequency, dd free dish new channel coming soon, dd free dish set top box mpeg4, dd direct plus frequency


DD Free Dish (फ्री डिश) के जरिए मार्केट के बड़े हिस्से पर काबिज होंगे : श्री जवाहर सरकार

DD Free Dish (फ्री डिश) के जरिए मार्केट के बड़े हिस्से पर काबिज होंगे : श्री जवाहर सरकार

सौजन्य से : www.samachar4media.com

प्रसार भारती के CEO जवाहर सरकार ने DD Free Dish को आम आदमी के लिए बेहतर विकल्‍प बताते हुए खुलासा किया कि वह 59 चैनलों से बढ़ाकर जल्‍द ही इसके चैनलों की संख्‍या 112 करने जा रहे हैं।
DD Free Dish (फ्री डिश) के जरिए मार्केट के बड़े हिस्से पर काबिज होंगे : श्री जवाहर सरकार
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प्रस्‍तुत हैं जवाहर सरकार से समाचार4मीडिया ब्‍यूरो के साथ बातचीत के कुछ अंश :

क्‍या terrestrial TV से प्रसार भारत को नुकसान हो रहा है ?  
यहां नुकसान जैसी कोई बात ही नहीं है क्‍योंकि हम बैलेंस शीट के सिद्धांत में विश्‍वास ही नहीं रखते हैं। जब भी आप कोई चीज मुफ्त में देते हैं तो आप यह नहीं कहते हैं कि मैं कैसे तुम्‍हें चीजें कितने फ्री में दे रहा हूं। Terrestrial TV के अपने दिन थे, पर अब ये काफी नीचे जा रहा है। दो साल पहले दूरदर्शन में किसी को इसका संज्ञान नहीं था। मैंने इसे समझा क्‍योंकि मैंने आंकड़ों का अध्‍ययन किया। हमें एक गरीब आदमी या एक सामान्‍य आदमी के लिए किसी ऐसे विकल्‍प की जरूरत थी। और यह विकल्‍प अब फ्री डिश के रूप में सामने आ रहा है।

Free Dish (फ्री डिश) की उपलब्‍धता को कैसे बढ़ाया जा रहा है?
Free Dish सिर्फ लगभग 2000 रुपये का है। अभी इसके 59 चैनल हैं और यदि हम इसके चैनलों की संख्‍या 112 तक बढ़ा देते हैं तो आप Hindi Discovery जैसे चैनल भी देख सकते हैं और इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद आपको किसी भी चीज की ज्‍यादा जरूरत नहीं रह जाती है। क्‍या सभी के पास free-to-air (FTA) का विकल्‍प था, पर Free Dish ने इसी बात को अपने ध्‍यान में रखा था।


यह इंटरव्यू (बातचीत) समाचार4मीडिया.कॉम के सौजन्य से है, श्री जवाहर सरकार का पूरा इंटरव्यू पड़ने के लिए जाये : www.samachar4media.com